रामपुरा शहर में आवारा कुत्तों का आतंक अब खूनी हो गया है। एक दिन में दो-दो मासूम बच्चियों पर जानलेवा हमला हुआ है और जिम्मेदार नगर परिषद अब भी कुंभकर्णी नींद में सो रही है।
पहला मामला – ग्राम जमालपुर की मासूम मेहर गरासिया पर पुराना बस स्टैंड पर कुत्तों के झुंड ने हमला किया। हालत इतनी गंभीर थी कि रामपुरा सिविल अस्पताल से तुरंत उसे नीमच जिला चिकित्सालय में भर्ती कराना पड़ा।
अभी इस घटना के जख्म सूखे भी नहीं थे कि दूसरा मामला सामने आ गया।
दूसरी मासूम – रोशनी पिता दीपक माली, निवासी रामपुरा को भी आवारा कुत्तों ने बुरी तरह नोच डाला। शहर के अंदर दिनदहाड़े बच्चों पर हमले हो रहे हैं।
आखिर रामपुरा नगर परिषद और शासन-प्रशासन चाहता क्या है?
शहर की गलियों में आवारा पशु और आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं। ये कुत्ते अब बच्चों की जान लेने पर तुले हुए हैं।
कई बार शिकायत, कई बार आवेदन, कई बार खबरें… लेकिन नगर परिषद ने आज तक एक भी कुत्ते को नहीं पकड़ा, ना ही नसबंदी अभियान चलाया।
सवाल बड़ा है – क्या नगर परिषद बच्चों की मौत का इंतजार कर रही है? क्या किसी मासूम की जान जाने के बाद ही परिषद की आंखें खुलेंगी?
रामपुरा की जनता में भारी गुस्सा है। अगर 24 घंटे के अंदर नगर परिषद ने कुत्तों की धरपकड़ शुरू नहीं की तो पालक सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।