रामपुरा में गरीबों पर ही क्यों चलता है सरकारी डंडा
रामपुरा में आज मनासा कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी की कार्रवाई पर गंभीर नहीं, बहुत गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कार्रवाई नहीं, ये गरीबों का शोषण है और दबंगों को बचाने की पूरी सेटिंग है।
खेल कैसे चल रहा है?
सूत्रों का आरोप है कि रामपुरा में कार्रवाई से पहले ही दबंग माफियाओं को सूचना दे दी जाती है – “मैं आ रहा हूं, दुकान बंद रखना”। इसलिए जब अधिकारी आते हैं तो बड़े गोदामों पर ताले लगे मिलते हैं।
और डंडा चलता है सिर्फ उन गरीबों पर जो सड़क किनारे चाय बेच रहे हैं, छोटा सा होटल चला रहे हैं, या मजदूर जो 2 किलो की छोटी टंकी में गैस भरकर अपना चूल्हा जला रहे हैं।
असली काला बाजारी कौन कर रहा है?
रामपुरा में खुलेआम फोर व्हीलर गाड़ियों में रोज 10 से 15 घरेलू LPG टंकियों की अवैध रिफिलिंग हो रही है। घरेलू गैस को कमर्शियल में बेचकर हजारों का मुनाफा कमाया जा रहा है। ये है असली माफिया।
लेकिन खाद्य अधिकारी इनको इग्नोर क्यों करते हैं? क्योंकि इनकी सीधी पहुंच बड़े लेवल की है
गरीबों पर रिजल्ट, दबंगों को संरक्षण
बड़े माफिया को छोड़कर, गरीब चाय वालों की 2 किलो की टंकी जब्त करके फोटो खिंचवाना और सरकार को रिपोर्ट भेजना कि “बड़ी कार्रवाई की” – ये सिर्फ कागजी खानापूर्ति है।
जनता की 3 मांग
रामपुरा में जितने भी फोर व्हीलर से अवैध गैस रिफिलिंग करते हैं, उनके गोदामों पर बिना सूचना के छापा मारा जाए।
गरीब चाय-ठेला वालों को डराया नहीं, बल्कि उन्हें नियमानुसार छोटे कमर्शियल कनेक्शन लेने में मदद की जाए।
इस पूरे मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारी – जिला आपूर्ति अधिकारी नीमच द्वारा की जाए।
कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। अगर कानून सिर्फ गरीबों के लिए है तो ये कार्रवाई नहीं, अन्याय है।