रामपुरा: प्राइवेट स्कूलों की अवैध गाड़ियां बनी बच्चों के लिए काल। बिना परमिट, बिना फिटनेस दौड़ रही ओमनी-तूफान, प्रशासन मौन
रामपुरा, नीमच। रामपुरा के प्राइवेट स्कूल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। कभी महंगी किताब-कॉपी, कभी ड्रेस को लेकर विवाद, और अब बच्चों को लाने-ले जाने वाली गाड़ियों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
शहर में अधिकांश स्कूलों द्वारा टैक्सी परमिट, RTO फिटनेस और शिक्षा विभाग की अनुमति के बिना ओमनी, मारुति कार और तूफान जैसी गाड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन गाड़ियों में क्षमता से ज्यादा बच्चे ठूंस-ठूंस कर भरे जाते हैं।
हाल ही में हुआ बड़ा हादसा
कुछ दिन पहले सरस्वती ज्ञान मंदिर स्कूल, मांझेरिया की वैन की लापरवाही से भावना पिता हीरालाल नामक मासूम बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे नीमच रेफर करना पड़ा। आरोप है कि वैन ड्राइवर ने बच्ची को रॉन्ग साइड उतार दिया था।
कानून क्या कहता है?
- मोटर व्हीकल एक्ट 1989 + सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन 1997: स्कूल वाहन पीली पट्टी, “On School Duty” लिखा, स्पीड गवर्नर, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र अनिवार्य।
- RTO नियम: स्कूल वाहन के लिए अलग टैक्सी परमिट और साल में 2 बार फिटनेस जरूरी।
- शिक्षा विभाग के नियम: हर स्कूल को परिवहन के लिए शिक्षा विभाग और RTO से अनुमति लेना अनिवार्य। ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस और पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए।
वाहन में अटेंडर
होना जरूरी। क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जा सकता।
सवाल: जिम्मेदार कौन?
आज रामपुरा में 90% स्कूल गाड़ियों के पास न परमिट है, न फिटनेस, न अटेंडर। फिर भी रोजाना सैकड़ों बच्चे इनमें सफर कर रहे हैं। RTO, शिक्षा विभाग और प्रशासन आंख बंद किए बैठा है। जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर चुप हैं।
जनता की मांग
- RTO और शिक्षा विभाग 7 दिन में रामपुरा के सभी स्कूल वाहनों की संयुक्त जांच करे।
- बिना परमिट, बिना फिटनेस चल रही गाड़ियों को त्काल जब्त किया जाए।
- हाल के हादसे में दोषी स्कूल प्रबंधन और ड्राइवर पर IPC 337, 304A के तहत कार्रवाई हो।
- प्रत्येक स्कूल को अपने वाहन का विवरण स्कूल नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर सार्वजनिक करना अनिवार्य किया जाए।
बच्चे किसी के खिलौने नहीं हैं। अगर आज कार्रवाई नहीं हुई तो कल कोई और भावना इसकी कीमत चुकाएगी।