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बिना सुरक्षा उपकरण खंभे पर चढ़ा आउटसोर्स कर्मी, 20 फीट से गिरा, हालत गंभीर रामपुरा हादसा: विद्युत मंडल की लापरवाही की भेंट चढ़ा मनीष आर्य जिला अस्पताल रेफर

On: August 17, 2026 4:05 PM
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आउटसोर्स कर्मचारी की जान सस्ती? सुरक्षा के बिना करवाया काम, गिरकर घायल

रामपुरा में बिजली कर्मी गिरा, सवाल: बीमा, मुआवजा और सुरक्षा का क्या

घायल आउटसोर्स कर्मी मनीष आर्य को मिले पूरे सरकारी लाभ और इसके पीछे कौन दोषी उसके ऊपर हो कारवाही क्या एक आउटसोर्स कर्मचारी को पोल पर चढ़ने का प्रावधान है

रामपुरा में बिना सुरक्षा उपकरण खंभे पर चढ़े आउटसोर्स कर्मचारी की करंट लगने से 20 फीट ऊपर पोल से गिरा, हालत गंभीर

रामपुरा, नीमच सोमवार सायं रामपुरा के आवरासात मोहल्ले में कार्य के दौरान बिजली आउटसोर्स कर्मचारी मनीष आर्य जो की पेल पर चढ़कर विद्युत का कार्य कर रहा था जो की एक लाइनमैन को चढ़ने का अधिकार है पोल पर जो अपनी जगह एक आउटसोर्स कर्मचारी को मौत के मुंह में धकेलते हैं बड़ा हादसा हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बिजली खंभे पर चढ़े आउटसोर्स कर्मचारी मनीष पिता बाबूलाल आर्य , 28 वर्ष, निवासी रेगर मोहल्ला को विद्युत का कार्य करते समय करंट लगने से वह करीब 20 फीट की ऊंचाई से नीचे गिर गया।

गंभीर चोटों के कारण उसे पहले रामपुरा सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत नाजुक देखते हुए जिला अस्पताल नीमच रेफर कर दिया गया।

सबसे बड़ा सवाल – सुरक्षा कहां थी
आरोप है कि खंभे पर काम कर रहे कर्मचारी के पास न तो सेफ्टी बेल्ट थी, न हेलमेट, न दस्ताने मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के नियमों के अनुसार किसी भी लाइनमैन को सुरक्षा उपकरण के बिना खंभे पर नहीं चढ़ाया जा सकता। इसके बावजूद आउटसोर्स कर्मचारियों से जान जोखिम में डालकर काम करवाया जा रहा है।

कानून क्या कहता है?

मध्य प्रदेश विद्युत आउटसोर्स नीति 2022* के अनुसार प्रत्येक आउटसोर्स कर्मी का ईपीएफ, ईएसआई और 10 लाख का दुर्घटना बीमा अनिवार्य है।

श्रम कानून* के तहत कार्य के दौरान दुर्घटना होने पर कंपनी और विभाग दोनों जिम्मेदार हैं।
घायल कर्मचारी को तत्काल 50 हजार की अंतरिम सहायता और इलाज का पूरा खर्च विभाग को देना होगा।

आज मनीष की जगह कोई भी हो सकता था। आउटसोर्स कर्मचारी भी इंसान हैं, उनके घर परिवार हैं। सिर्फ ठेकेदार को भुगतान करके विभाग अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।

घायल मनीष के इलाज का पूरा खर्च विद्युत मंडल वहन करे।
बीमा और मुआवजे की प्रक्रिया 7 दिन में शुरू हो।

पूरे जिले में बिना सुरक्षा उपकरण काम करवाने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई हो।

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