चंबल नदी पर हक किसका महासंघ-ठेकेदार में डील पक्की, मछुआरा समाज आज भी बेरोजगार
आज खबर चंबल नदी से, और सवाल मछुआरा समुदाय के हक का।
चंबल नदी में पूजा हो गई, महासंघ का मछली ठेकेदार से एग्रीमेंट भी हो गया। लेकिन… लेकिन मछुआरा समुदाय आज भी बेरोजगार है
कहानी समझिए। हर साल की तरह इस साल भी चंबल नदी में विधि-विधान से पूजा की गई। महासंघ ने मछली ठेकेदार से अपना एग्रीमेंट कर लिया। कागजी कार्रवाई पूरी।
लेकिन जिनके बाप-दादा ने चंबल को अपना जीवन दिया, जो मछुआरा समुदाय पीढ़ियों से चंबल पर निर्भर है, आज तक उस समुदाय से कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ है।
सवाल ये है कि आखिर मछुआरा समुदाय कब तक बेरोजगार रहेगा?
जब ठेकेदार से एग्रीमेंट हो सकता है, तो मछुआरों से क्यों नहीं?
मछुआरा समुदाय के अध्यक्ष ने इस पूरे मामले पर क्या कहा है, जरा सुनिए…
अध्यक्ष का साफ कहना है कि अगर जल्द ही मछुआरा समुदाय से एग्रीमेंट नहीं हुआ तो समाज आंदोलन को मजबूर होगा।
क्योंकि चंबल पर पहला हक मछुआरा समाज का है, किसी ठेकेदार का नहीं।